World Poetry Day: आज कोई भूखे पेट नहीं सोएगा…

World Poetry Day: आज कोई भूखे पेट नहीं सोएगा…

World Poetry Day:

सूखी रोटी सहेज कर रखी है मां
आज कोई भूखे पेट नहीं सोएगा।।

फेंको मत बरक्कत है बासी रोटी
कई लोग बहुत दिनों से भूखे हैं।।

बिखरी पड़ी है पटरियों में रोटी सूखी
जीवन तलाशते जिंदगी ने मंजिल पा ली।

सारी मशक्कत है दो जून की रोटी के लिए ।
सत्ता, पूंजी की हवस ने हैवान बना दिया।।

तुम्हें फिक्र है सियासत न चली जाए
लोग परेशान हैं कफन दफन कैसे किया जाए।

गणेश कछवाहा
रायगढ़, छत्तीसगढ़।

कथा साहित्य