विश्व हिंदी दिवसः दुनिया के 75 देशों के हिंदी भाषियों को एक मंच पर साथ लेकर आया कू ऐप

विश्व हिंदी दिवसः दुनिया के 75 देशों के हिंदी भाषियों को एक मंच पर साथ लेकर आया कू ऐप

नई दिल्ली। सारे जहाँ से अच्छा हिंदोस्ताँ हमारा, हिंदी हैं हम वतन हैं, हिंदोस्ताँ हमारा… एक सदी से भी पहले प्रसिद्ध शायर मुहम्मद इक़बाल की लिखी गई यह देशप्रेम की ग़ज़ल आज भी हर हिंदुस्तानी में हिंदी और राष्ट्रीयता की भावना जगाती है। सोशल मीडिया के तेज़ी से बढ़ते दायरे ने हिंदी को प्रमुखता से पेश किया और अब देश के पहले मेड-इन-इंडिया माइक्रो-ब्लॉगिंग प्लेटफ़ॉर्म कू ऐप ने दुनियाभर के हिंदी बोलने वालों को अभिव्यक्ति का ज़बरदस्त मंच दे दिया है। आलम यह है कि कुल दो करोड़ डाउनलोड मील का पत्थर हासिल कर चुके इस मंच पर दुनिया के 75 देशों के यूजर्स हिंदी में कू करते हैं। विश्व हिंदी दिवस के मौक़े पर भारत में हिंदी को बढ़ाने में Koo App की भूमिका पर चर्चा करना बेहद ज़रूरी हो जाता है।

इसके अलावा अगर हिंदी में कू करने वाले यूजर्स के व्यवसाय को देखें तो टॉप सूची में प्रोफेशनल, कवि, अभिनेता, समाजसेवी/एक्टिविस्ट, बिजनेस ओनर्स, लेखक, छात्र, शिक्षक, राजनेता, पत्रकार और मीडिया शामिल हैं। इस ऐप पर तमाम क्षेत्रों से देश की दिग्गज हस्तियां नियमित रूप से अपनी जुबान में कू करती हैं और लोगों से संवाद स्थापित करती हैं। कू ऐप पर तेजी से जुड़ते नए यूजर्स के साथ इस वर्ष डाउनलोड का आंकड़ा 10 करोड़ पार होने की उम्मीद है।

इस संबंध में कू ऐप के प्रवक्ता ने कहा, “विश्व हिंदी दिवस के मौके पर हमें यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि इस पर मंच 75 देशों के यूजर्स हिंदी में चर्चा करते हैं। यह ऐप ना केवल भारत बल्कि दुनियाभर के हिंदी बोलने वालों को एक साथ जोड़ता है, जो हमारे मकसद से मेल खाता है। कू ऐप भाषाओं को लोकतांत्रिक करता है और दुनिया में इस मंच पर हिंदी का भी प्रमुख स्थान है। आने वाले वक्त में कू ऐप हिंदी समेत अन्य भारतीय भाषाओं को और सशक्त बनाने के लिए कई और फीचर्स पेश करेगा।”

हिंदी की प्रसिद्धि

दरअसल, संविधान की धारा 343(1) के अनुसार भारतीय संघ की राजभाषा हिंदी एवं लिपि देवनागरी है। आठवीं अनुसूची में शामिल हिंदी हमारे देश की राजभाषा होने के साथ-साथ दुनियाभर में तीसरी सबसे ज़्यादा बोली जाने वाली भाषा है। जबकि भारत में करीब 10 प्रतिशत ऐसी आबादी है, जो अंग्रेजी भाषा बोलती-समझती है। इसके अलावा बाकी की 90 प्रतिशत आबादी विभिन्न भाषाओं में बात करती है। अगर आँकड़ों की बात करें तो वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक़ भारत में 121 विभिन्न भाषाएँ हैं, जो बोली और समझी जाती हैं। इनमें हर एक भाषा को कम से कम 10 हज़ार से ज़्यादा लोग बोलते हैं।

वहीं, देश में हिंदी और अंग्रेज़ी को केंद्र सरकार ने काम-काज की आधिकारिक भाषा बनाया हुआ है। हालाँकि राज्यों में उनकी भाषाएँ अलग-अलग हो सकती हैं। विशेषरूप से दक्षिण भारतीय राज्यों में इसे स्पष्ट तौर पर देखा जा सकता है। जबकि देश में 22 भाषाओं को संवैधानिक रूप से आधिकारिक भाषा का दर्जा दिया गया है। भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले राजभाषा विभाग की मासिक ई-बुक राजभाषा भारती में छपे लेख के मुताबिक आज पूरी दुनिया में 64 करोड़ लोगों की मातृ भाषा हिंदी है और 24 करोड़ लोगों द्वारा बोली जाने वाली दूसरी भाषा है। दुनिया के 150 विश्वविद्यालयों में हिंदी का पठन-पाठन होता है, जबकि पश्चिमी देशों में क़रीब 35,000 छात्र हिंदी पढ़ते हैं।

Koo के बारे में

Koo App की लॉन्चिंग मार्च 2020 में भारतीय भाषाओं के एक बहुभाषी, माइक्रो-ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म के रूप में की गई थी, ताकि भारतीयों को अपनी मातृभाषा में अभिव्यक्ति करने में सक्षम किया जा सके। स्मार्ट फ़ीचर्स वाला Koo App वर्तमान में हिंदी, मराठी, गुजराती, पंजाबी, कन्नड़, तमिल, तेलुगु, असमिया, बंगाली और अंग्रेजी समेत 10 भाषाओं में उपलब्ध हैं। राजनीति, खेल, मीडिया, मनोरंजन, आध्यात्मिकता, कला और संस्कृति के मशहूर लोग द्वारा अपनी मूल भाषा में दर्शकों से जुड़ने के लिए सक्रिय रूप से मंच का लाभ उठाते हैं।

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