Story Book: बेले, अंतिम खच्चर : पढ़िए नागरिक अधिकारों की रोचक कहानी

Story Book: बेले, अंतिम खच्चर : पढ़िए नागरिक अधिकारों की रोचक कहानी

Story Book : कहानी का शीर्षक सुनने में थोड़ा अटपटा है, लेकिन कहानी है बड़ी रोचक और मर्मस्पर्शी। यह कहानी महान नागरिक अधिकार नेता डॉ. मार्टिन लूथर किंग जूनियर से जुड़ी है। यह कहानी करीब छह दशक पुरानी है और सत्य घटना से प्रेरित है। दरअसल किंग का पूरा जीवन गरीबों- मजदूरों के अधिकारों के लिए लड़ते हुए बीता था। वे मजदूरों के हित चिंतक थे। उस दौर में सामान ढोने वालों के लिए खच्चर एक मददगार साथी के रूप में काम करता था।

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किंग खच्चर को श्रम की ताकत का प्रतीक मानते थे और उन्होंने कहा था कि मौत के बाद खच्चर के सहारे मेरा ताबूत ले जाया जाए। बेले, खुशनसीब खच्चर, जिसे मार्टिन लूथर किंग जूनियर की अंतिम यात्रा में उनके गंतव्य तक पहुंचाने का सौभाग्य मिला। शीर्षक से स्पष्ट है कि बेले ही इस कहानी का मूल किरदार है। लेखक केल्विन रामसे ने बड़े ही उदारवादी मानवीय दृष्टिकोण से बेले को केंद्र बिंदु में रखकर यह कहानी लिखी है। 18 पृष्ठों की सचित्र पुस्तक ई- पुस्तकालय के माध्यम से आप यहां पढ़ सकते हैं। आप इस कहानी को यहां पढ़ने के साथ-साथ सुन भी सकते हैं।

एलेक्स एक स्टोर के बाहर बेंच पर बैठा था. वो जाकर खेलना चाहता था, लेकिन मां ने उससे वहां इंतजार करने को कहा था. वहां बैठे-बैठे एलेक्स को करने के लिए कुछ भी नहीं था. तभी उसने सड़क के पार के बगीचे में, एक बूढ़े खच्चर को चरते हुए देखा. हवा एकदम चुप थी. चीनाबेरी के पेड़ों की एक भी पत्ती हिल नहीं रही थी. इतना सन्‍नाटा था कि एलेक्स खच्चर को बगीचे में सब्ज़ी की हरी पत्तियां कुतरते हुए सुन सकता…

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कथा साहित्य