Social media: अखबार में छपी भरी गर्मी में नंगे पैर स्कूल जाते बच्चों की तस्वीर, देखकर रिटायर्ड पुलिस अफसर ने उठाया यह कदम

Social media: अखबार में छपी भरी गर्मी में नंगे पैर स्कूल जाते बच्चों की तस्वीर, देखकर रिटायर्ड पुलिस अफसर ने उठाया यह कदम

रायपुर। (हिमांशु शर्मा) Social media: अच्छा इंसान कौन होता है? वह इंसान जिसके दिल में दूसरों के लिए हमदर्दी होती है। हमदर्दी का मतलब दूसरों की तकलीफ, उनका दर्द अपनी तरह महसूस करना।

आप में से बहुत से लोगों ने सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब परिवारों के बच्चों को नंगे पैर स्कूल जाते जरूर देखा होगा। गर्मी, ठंड, बरसात हर तरह के मौसम में यह बच्चे नाचते- कूदते, हंसते- खेलते, नंगे पैर स्कूल जाते दिखते हैं। यह बच्चे किसी शौक से नंगे पैर स्कूल नहीं जाते, बल्कि ऐसे स्कूल जाना उनकी मजबूरी है। बहुत कम ऐसे लोग होंगे जिन्होंने अपने बच्चों की तरह इनके लिए पैरों में चप्पल या जूते की जरूरत महसूस की होगी और उसे पूरा करने की कोशिश की होगी।

ट्विटर प्रोफाइल से ली गई तस्वीर

जो बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं और गरीब घर के हैं वह आज भी नंगे पैर स्कूल जाते हैं। उनके अभिभावकों के पास संसाधनों का अभाव होता है। सरकार से जो यूनिफॉर्म मिलती है उसी में उन बच्चों का अनुशासित, सक्षम और सुखद भविष्य का सपना सजता है। छत्तीसगढ़ के रिटायर्ड पुलिस अफसर आरके विज ने कुछ बच्चों की एक तस्वीर अखबार में छपी देखी।

इस तस्वीर में ग्रामीण इलाके के सरकारी स्कूल के बच्चे, जो यूनिफॉर्म में नजर आ रहे थे, उनके पैरों में चप्पल नहीं थीं। बहुत से सक्षम और खुद को संवेदनशील समझने वाले लोग इस तरह की तस्वीर अखबार में देखने के बाद उसे मोड कर एक कोने में रख देते हैं। कुछ लोग थोड़ी हमदर्दी दिखाते हुए अखबार की तस्वीर का स्क्रीनशॉट लेकर एक ट्वीट करते हुए सरकार को कोस सकते हैं, लेकिन बहुत कम लोग होंगे जो बिना स्वार्थ के, सिर्फ संवेदना वश उन बच्चों के पास जाकर उनकी चप्पल की जरूरत तत्काल पूरी करने जैसा कदम उठा सकते हों।

दैनिक भास्कर में प्रकाशित तस्वीर का स्क्रीनशॉट

तस्वीर देखने के बाद विज साहब से रहा नहीं गया और बच्चों के लिए चप्पलों से भरा बैग लेकर उनके गांव पहुंच गए। छुट्टी के बाद स्कूल से बाहर निकले उन बच्चों को उन्होंने चप्पलें पहनाईं। नई चप्पल पाकर बच्चे बेहद खुश हुए। गर्मी की चिलचिलाती धूप में नई चप्पलों से नन्हे नन्हे कदमों को जो राहत मिली उसकी खुशी चेहरे पर झलक आई।

इन बच्चों को शायद नहीं पता यह शख्स कौन हैं जो उन्हें चप्पल पहना कर गए? लेकिन निश्चित ही यह बात उन्हें पूरे जीवन एक नैतिक शिक्षा के रूप में याद रहेगी और बच्चे आगे बड़े होकर जब खुद सक्षम बनेंगे तो इन्हीं की तरह बच्चों के हमदर्द बनेंगे। बच्चे किसी वोट बैंक का हिस्सा नहीं होते इसलिए ज्यादातर लोग जो राजनीति के लिए समाज सेवा के कार्य का दिखावा करते हैं, उनका बच्चों की समस्याओं से कोई विशेष सरोकार नहीं होता और शायद ऐसे लोगों के मन में उनके प्रति इस तरह की हमदर्दी हो भी नहीं सकती।

आईपीएस (रि.) आरके विज ने एक ट्वीट में 2 तस्वीरें साझा की हैं और एक बड़ी बात कम शब्दों में लिखी है। सोशल मीडिया पर लोग उनके इस कार्य की सराहना कर रहे हैं, साथ ही इसे प्रेरक भी बता रहे हैं।
उन्होंने बच्चों के लिए जो प्रेम प्रदर्शित किया है वह बहुत ही अनमोल है। लोगों के प्रति सच्ची और अच्छी भावना रखने वाले लोगों को उन्हें सोशल मीडिया पर फॉलो करना चाहिए। उनकी सामाजिक हित से जुड़ी गतिविधियों और खुद की संतुष्टि के लिए किए गए परोपकार के उनके कार्यों व विचारों से सभी प्रेरणा ले सकते हैं।

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