Poetry of Colours: एक तरफ रंगों में समाया जीवन दर्शन, दूसरी ओर नारी मन की व्यथा, सुनिए शिरीन की दो कविताएं…

Poetry of Colours: एक तरफ रंगों में समाया जीवन दर्शन, दूसरी ओर नारी मन की व्यथा, सुनिए शिरीन की दो कविताएं…

Poetry of Colours: एक तरफ रंगों में समाया जीवन दर्शन, दूसरी ओर नारी मन की व्यथा, सुनिए शिरीन की दो कविताएं…

रंग जो जीना सिखाते हैं…

रंग जो जीना सिखाते हैं,
खूबसूरत और प्यारे रंग।
रंग जो उमंग भर देते हैं
हर मन को खुश देते हैं।

हर तरफ रंग हैं बिखरे हुए
कहीं फूलों के रंग
हरियाली के संग
आबशारों के रंग
और पहाड़ों के रंग

रंग जीना सिखाते हैं
कहते हैं हमसे
कि जिंदगी खूबसूरत है
दिल से जीने की जरूरत है

आओ ऐ दोस्तों
भले जीवन में यह सारे रंग
रंग लें जीवन अपना
भर दे और उनके जीवन में खुशियों के रंग ।

रंग जो जीना सिखाते हैं खूबसूरत और प्यारे रंग

मुहाजिर हूं मैं …

हां मुहाजिर हूं मैं ,
औरतें तो मुहाजिर ही होती हैं ।
उनका अपना कोई घर नहीं होता ।
भटकती हैं दर ब दर….
क्योंकि नहीं होता उनका अपना घर ।
कभी यह मेहमान होती हैं बाबा के घर ,
कभी भाईयों के घर रहती हैं ।
शादी होते ही पराई कहलाती है,
दूसरे आंगन आ जाती हैं ।
वह होता है पति का घर ,
पति के जाते ही वह घर ,
जिसे संवारती ,सजाती हुई
बुढ़ापे की दहलीज तक पहुंचती है,
वह घर कहलाता है……
बेटे का घर।
कहां है मेरा घर ??
मेरा अपना घर।
एक घर से सफर करती हुई ,
कई घरों से गुज़रती हुई ,
मै खड़ी हूं. …
ढूंढती हुई….
अपना घर।

शिरीन खान, अंबिकापुर

कथा साहित्य