4 साल तक कांग्रेस सरकार ने किया ऐसा काम, इसलिए अब देने पड़ रहे हैं पेट्रोल- डीजल के महंगे दाम

4 साल तक कांग्रेस सरकार ने किया ऐसा काम, इसलिए अब देने पड़ रहे हैं पेट्रोल- डीजल के महंगे दाम

नई दिल्ली। राहुल गांधी ने आज ट्विटर पर एक स्टैटिकल ग्राफ साझा करते हुए मोदी सरकार पर तंज कसा है। स्टैटिकल ग्राफ में पेट्रोल डीजल की बढ़ती कीमतों को दर्शाया गया है। इसमें यह दर्शाया गया है कि भाजपा की सरकार बनने के बाद किस तरह से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ ही राहुल गांधी ने एक सवाल छोड़ा है। उन्होंने ग्राफ के साथ लिखा की पेट्रोल डीजल की कीमतें कब कम होंगे क्या जब चुनाव होने वाले होंगे तब?

तो आपको बता दें कि राहुल गांधी ने जो सवाल पूछा है दरअसल उस सवाल का जवाब राहुल गांधी के ही पास है। इसे ही कहते हैं राजनीति, सवालों के जवाब आप छुपाईए और उल्टे सवाल कीजिए। आपको बता दें कि आज पेट्रोल डीजल की जो कीमतें बढ़ रही हैं उसकी जिम्मेदार तक वर्तमान भाजपा सरकार नहीं है और वर्तमान सरकार पर इसका ठीकरा फोड़ा जाना बिल्कुल गलत है।

राष्ट्रीय स्तर पर पेट्रोल- डीजल की कीमतों में हुई वृद्धि को लेकर भाजपा के खिलाफ कांग्रेस माहौल बना रही है, लेकिन आपको बता दें कि यह सब पिछली कांग्रेस सरकार की ही देन है, जिसकी वजह से आज पेट्रोल डीजल की भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। दरअसल साल 2010 से 2014 के बीच जब मनमोहन सिंह देश के प्रधानमंत्री थे। उस दौरान तेल कंपनियों को दी जाने वाली सब्सिडी की बजाय सरकार ने अरबों रुपए के ऑयल बॉन्ड जारी किए थे। यानी पेट्रोल- डीजल की कीमतों में सरकार की ओर से दी जाने वाली सहायता इन 4 वर्षों तक तेल कंपनियों को नहीं दी गई और इसके बदले उन्हें भविष्य में भुगतान किए जाने वाले बॉन्ड पेपर जारी किए गए।


4 साल तक कांग्रेस सरकार ने खरबों रुपए के ऑयल बॉन्ड जारी किए, अब उसी का खामियाजा मोदी सरकार उठा रही है। इन बॉन्ड पेपर का मतलब यह था कि फौरी तौर पर सरकार तेल कंपनियों को कोई भी रकम अदा नहीं करेगी, लेकिन भविष्य में आने वाली सरकारें मय ब्याज उस रकम को चुकाएंगी। इसी का ताजा इंपैक्ट पेट्रोल डीजल की बढ़ती कीमतों में हमें देखने को मिल रहा है।

पिछली सरकार ने 1.31 लाख करोड रुपए के आयल बांड जारी किए। इस बांड का भुगतान केंद्र सरकार को अक्टूबर 2021 से मार्च 2026 तक के बीच करना होगा। इस साल केंद्र सरकार को बांड पर करीब 20000 करोड रुपए का ब्याज ही चुकाना होगा। इस साल अक्टूबर और नवंबर में केंद्र सरकार 5- 5 हजार करोड़ के बांड का भुगतान करेगी। इसके बाद साल 2023 में फिर 22000 करोड रुपए के बांड का भुगतान केंद्र सरकार करेगी। साल 2024 में 40000 करोड और साल 2026 में 37000 करोड रुपए के बांड की अदायगी की जाएगी। इस तरह तत्कालीन समय में जनता को खुश करने के लिए कांग्रेस सरकार द्वारा चली गई बॉन्ड पॉलिसी अब भाजपा सरकार पर आर्थिक बोझ लाद रही है। साथ ही कांग्रेस को राजनीति के लिए पेट्रोल डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का मुद्दा मिल गया है।

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