वन संबंधी योजना बनाने और प्रबंधन में अब ग्राम सभा की होगी महत्वपूर्ण भूमिका

वन संबंधी योजना बनाने और प्रबंधन में अब ग्राम सभा की होगी महत्वपूर्ण भूमिका

नई दिल्ली । पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और जनजातीय कार्य मंत्रालय ने आज वन संसाधनों के प्रबंधन में जनजातीय समुदायों को ज्‍यादा अधिकार उपलब्‍ध कराने की संयुक्‍त घोषणा पर हस्‍ताक्षर किेए। यह संयुक्‍त घोषणा वन अधिकार अधिनियम से संबंधित है जो जनजातीय समुदायों के वन अधिकारों को मान्‍यता देता है और ऐसे अधिकार उपलब्‍ध कराता है।

पर्यावरण वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावडेकर तथा जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा की उपस्थिति में इस संयुक्‍त घोषणा पर हस्‍ताक्षर किए गए।
संयुक्‍त घोषणा पर हस्‍ताक्षर को ऐतिहासिक बताते हुए श्री जावडेकर ने कहा कि केन्‍द्र सरकार जनजातीय समुदायों और वनवासियों के कल्‍याण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्‍होंने कहा कि इस घोषणा से जनजातीय समुदाय सक्षम होंगे और वनाधिकार अधिनियम के प्रभावी कार्यान्‍वयन में मदद मिलेगी।

श्री जावडेकर ने कहा कि पिछले सात वर्ष में पांच लाख जनजातीय लोगों को जमीन के अधिकार दिए गए हैं और ग्राम सभा की 25 हजार से अधिक समितियां बनाई गई हैं। उन्‍होंने कहा कि जनजातीय बजट को दोगुना कर दिया गया है। वन धन योजना से चार लाख वनवासियों को लाभ हुआ है। उन्‍होंने वन और जनजातीय अधिकारियों को निर्देश दिया कि वन संबंधी योजना बनाने और प्रबंधन में ग्राम सभा को शामिल किया जायेगा।

जनजातीय कार्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि जनजातीय समुदायों और वनवासियों ने हमेशा वनों के संरक्षण को बढावा दिया है। उन्‍होंने कहा कि जल, वन और जमीन हमारी पारंपरिक पद्धति है और जनजातीय समुदाय वनों के रक्षक हैं।

उन्‍होंने कहा कि संयुक्‍त घोषणा पर हस्‍ताक्षर वन अधिकार अधिनियम का विस्‍तार है। इससे जैव विविधता और वनों के संसाधन बनाए रखने में मदद मिलेगी।

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