Dada ki Rasoi: सिर्फ ₹10 में जरूरतमंदों का पेट भर रही रायपुर के युवा शोएब ढेबर की ‘दादा की रसोई’

Dada ki Rasoi: सिर्फ ₹10 में जरूरतमंदों का पेट भर रही रायपुर के युवा शोएब ढेबर की ‘दादा की रसोई’

रायपुर। Dada ki Rasoi: शोएब ढेबर की ‘दादा की रसोई’ ऐसे लोगों को भरपेट भोजन मुहैया करा रही है जो कमजोर आर्थिक हालात और गरीबी के चलते दो टाइम गुणवत्तापूर्ण भोजन नहीं जुटा पाते।

इस साल भर दैनिक रूप से चलने वाली रसोई में समाज के गरीब और वंचित वर्ग को सिर्फ 10 रुपये में भरपेट भोजन की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

जब रायपुर के युवा नेता शोएब ढेबर ने इस साल 1 फरवरी से गरीब से गरीब व्यक्ति को 10 रुपये में भोजन परोसना शुरू किया, तो उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि यह एक बहुत ही सराहनीय परियोजना होगी, जो दूसरों को परोपकार के पथ पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी। वह कहते हैं कि मैंने अपनी तरफ से सिर्फ लोगों की सेवा के लिए यह कदम उठाया था, लेकिन अब इसका दायरा बढ़ रहा है। हम चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक हमारी यह सेवा पहुंचे।

‘दादा की रसोई’, रायपुर के डा. भीमराव अंबेडकर अस्पताल के परिसर में संचालित हो रही है। शोएब का यह ओपन किचन आइडिया समाज के कमजोर वर्ग के लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल भीमराव अंबेडकर अस्पताल में रोजाना बड़ी संख्या में प्रदेश भर से मरीज के परिजन आते हैं। इनमें से बहुत से लोगों को सस्ते और गुणवत्तापूर्ण भोजन की आवश्यकता होती है। ‘दादा की रसोई’ ऐसे लोगों की जरूरत पूरी कर रही है।

23 साल की छोटी सी उम्र में युवा शोएब की उद्यमशीलता और सेवा की भावना के लिए रायपुर में स्थानीय लोग उनकी प्रशंसा कर रहे हैं। शोएब का कहना है कि दान शीलता की परंपरा परिवार से चली आ रही है। बड़े बुजुर्गों ने सिखाया है कि दीन दुखियों की सेवा करनी चाहिए और हम इसी काम में लगे हुए हैं।

‘दादा की रसोई’ के बारे में बोलते हुए, शोएब कहते हैं, “सेवा करने की कोई उम्र नहीं होती और न ही इंतज़ार करने की कोई उम्र होती है। अगर आपको लगता है कि यह सही समय है, तो ठीक है, यह सही समय है। एक कदम बढ़ाइए, आगे बढ़िए, भीतर के समर्पण को देखकर कोई नहीं रुकेगा, लेकिन आपको वह कदम उठाना होगा और इस तरह यह सब शुरू होता है। जितना अधिक आप अपने भाग्य का इंतजार करते हैं, उतनी ही देर हो जाती है।”

छत्तीसगढ़ रायपुर