Cow dung sleeper: गाय के गोबर से चप्पल, ईटें, बैग, मूर्तियां, दिये जैसी अनूठी चीजें तैयार कर रहे  छत्तीसगढ़ के यह देसी कलाकार

Cow dung sleeper: गाय के गोबर से चप्पल, ईटें, बैग, मूर्तियां, दिये जैसी अनूठी चीजें तैयार कर रहे छत्तीसगढ़ के यह देसी कलाकार

Cow dung sleeper: यह तो हम सभी जानते हैं कि गाय का गोबर काफी उपयोगी होता है। गोबर से बनी खाद बेहतरीन कार्बनिक उर्वरक का कार्य करती है। इसके अलावा गांव में लोग गोबर के कंडे बनाकर घरेलू ईंधन के रूप में उसका इस्तेमाल करते हैं। गोबर के इन उपयोगों के अलावा इससे गोबर गैस भी तैयार की जाती है, लेकिन क्या कभी किसी ने सोचा है कि गोबर से चप्पल, बैग जैसी दैनिक उपयोग की चीजें भी बनाई जा सकती हैं।

छत्तीसगढ़ के गौठान में देसी कलाकार इस तरह के अनूठे अनुप्रयोग कर रहे हैं। यह कलाकार गोबर को ऐसे- ऐसे आकार देकर अनोखी कलाकृतियों में बदल रहे हैं, जिन्हें देखकर एक बार को भरोसा करना मुश्किल होता है कि इन्हें गोबर से तैयार किया गया है।

इस अनोखी कला के विकास की शुरुआत एक नवोन्मेषी के हिम्मत भरे कदम के साथ हुई। रायपुर के रितेश गुप्ता 15 साल पहले, खेती और पशुपालन के बारे में कुछ नहीं जानते थे, लेकिन प्रकृति से उनका जुड़ाव हमेशा से था। आस-पास फैला प्रदूषण और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए उन्होंने नौकरी छोड़कर, गौसेवा से जुड़ने का फैसला किया। वह स्थानीय गौशाला से जुड़ कर काम करने लगे। यहीं से एक नए कौशल की शुरुआत हुई।

गाय के गोबर से बनी चप्पलें

रितेश ने गोबर से बनाई जाने वाली इको फ्रेंडली चीजों के बारे में पढ़ना और सीखना शुरू किया। उन्होंने राजस्थान के प्रोफेसर शिवदर्शन मलिक से गोबर की ईटें बनाना सीखा। फिर उन्होंने गोबर की ईटें, लकड़ी, दिये, मूर्तियां आदि बनाने का काम शुरू किया।

ऐसे आया गोबर की चप्पलें बनाने का ख्याल

दरअसल गोबर से चप्पल बनाने का ख्याल रितेश को उनकी दादी की एक इच्छा को पूरा करने के मकसद से आया। रितेश बताते हैं कि उनकी दादी हमेशा इस बात की शिकायत करती थीं कि गांव के घर में जमीन में गोबर लिपि होने के कारण फर्स ठंडी होती थी। जबकि शहर के घरों में टाइल्स की वजह से वह ठंडक और राहत महसूस नहीं होती। दादी की इस बात पर रितेश ने विचार किया कि घर की टाइल्स पर गोबर तो लीप नहीं सकते, ऐसे में क्या पैरों में पहनने के लिए इसकी चप्पल बनाई जा सकती है? इसके बाद उन्होंने अपनी दादी के लिए गोबर से बनी इको फ्रेंडली चप्पल तैयार की।

उन्होंने इस चप्पल को बनाने में गोबर, ग्वारसम और चूने का इस्तेमाल किया है। एक चप्पल को बनाने में करीब 10 दिन का समय लगा। एक किलो गोबर से 10 चप्पलें बनाई जाती हैं। अगर यह चप्पल 3-4 घंटे बारिश में भीग जाएं, तो भी खराब नहीं होतीं। धूप में इसे सुखाकर दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। दादी के लिए बनाई गई चप्पल देखकर रितेश को और लोगों ने भी ऐसी चप्पले बनाने का ऑर्डर किया और फिर वह इसे व्यावसायिक रूप से बनाने लगे। इन चप्पलों की कीमत करीब 400 रुपये है। रितेश के इस आविष्कार को देखने के बाद उन्हें देश के कई शहरों से बैग्स और चप्पल के कई ऑर्डर्स मिल रहे हैं। अभी तक उन्होंने तक़रीबन 1000 चप्पलें बनाकर बेची हैं। 

नवोन्मेष के साथ-साथ गौ वंश का भी हो रहा कल्याण

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद गोठानी और गोवंश के विकास का काम शुरू हुआ। इसी क्रम में उन गायों को गोठान में रखे जाने की शुरुआत हुई, जिन्हें उनके मालिक दूध ना देने की वजह से आवारा छोड़ देते हैं। गौठान में पर्याप्त मात्रा में गोबर उपलब्ध थी और यही गौठान रितेश के लिए नवोन्मेष की प्रयोगशाला बन गई। फ़िलहाल रितेश, राज्य सरकार की ओर से बने गोठान को संभालने का काम करते हैं। नगर निगम के लोग, रायपुर के आस-पास से जख्मी और खाने के लिए भटकती गायों को इस गौशाला में लाते हैं।  यहां गोवंश की सेवा भी होती है और उनसे मिलने वाले गोबर से बहुत सी आकर्षक बहु उपयोगी सामग्रियां तैयार की जाती है। इस काम में अब रितेश के साथ बहुत से लोग जुटे हुए हैं। गौठान में अभी गोबर का इस्तेमाल करके तक़रीबन 30 तरह के उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं।


फिलहाल, इस गौशाला में 385 गायें हैं। इनके चारे का भी पूरा ध्यान रखा जाता है। वह शहर की सब्जी मंडी से बेकार सब्जियां भी लाते हैं, जो गाय के लिए बढ़िया चारा बनती हैं। गौठान में बहुत सी महिलाएं भी कार्य कर रही हैं और गोबर से कलात्मक वस्तुएं बनाने का हुनर सीख रही हैं। हाल ही में इन कलाकारों ने छत्तीसगढ़ सरकार के बजट के लिए गोबर से बना बजट बैग तैयार किया था, जिसकी काफी चर्चा हुई थी।

(गोबर से बनी चप्पल खरीदने के लिए आप भी रितेश से उनके मोबाइल नंबर 84618 83203 पर सम्पर्क कर सकते हैं।)

कला- संस्कृति छत्तीसगढ़ रायपुर