10 साल पुराने करोड़ों की हेराफेरी के मामले में दो शासकीय कर्मचारियों को एसीबी की टीम ने किया गिरफ्तार, रिटायर्ड आईएएस की भी हो सकती है गिरफ्तारी

10 साल पुराने करोड़ों की हेराफेरी के मामले में दो शासकीय कर्मचारियों को एसीबी की टीम ने किया गिरफ्तार, रिटायर्ड आईएएस की भी हो सकती है गिरफ्तारी

रायपुर। पेट्रोल डीजल की शासकीय खरीदी के नाम पर करोड़ों का फर्जीवाड़ा करने के 10 साल पुराने मामले में राज्य की एंटी करप्शन ब्यूरो टीम ने आरोपी दो पूर्व शासकीय अधिकारी और कर्मचारी को गिरफ्तार किया है।

एसीबी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अंबिकापुर जिला सरगुजा के प्रोटोकॉल विभाग साक्षात्कार शाखा में साल 2012 में पदस्थ रहे कुछ अधिकारी कर्मचारियों ने प्राइवेट ट्रेवल ऑपरेटर की मिलीभगत से वाहनों के फर्जी उपयोग और पेट्रोल डीजल की राशि के आहरण के लिए फर्जी वाहनों का नंबर देकर करोड़ों रुपए की हेराफेरी की थी। इस मामले में शिकायतकर्ता अधिवक्ता दिनेश कुमार सोनी ने सरगुजा कमिश्नर को शिकायत की थी।

उपायुक्त सरगुजा ने इस मामले की जांच की और आरोप सही पाए जाने पर एंटी करप्शन ब्यूरो मुख्यालय रायपुर को शिकायत एवं जांच प्रतिवेदन भेजा गया था। इस मामले में आरोपी तत्कालीन अपर कलेक्टर वीके धुर्वे तत्कालीन सहायक ग्रेड 2 बैजनाथ विश्वकर्मा तत्कालीन सहायक ग्रेड 2 उमेश चंद्र श्रीवास्तव ने मिलकर षड्यंत्र करते हुए 4 ट्रेवल ऑपरेटरों को इस षड्यंत्र में शामिल किया।

ट्रैवलिंग एजेंसी संचालक अजय कुमार मिश्रा विजय कुमार गुप्ता अखिल कुमार गुप्ता दिलीप कुमार विश्वकर्मा सहित सातों के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध विवेचना शुरू की गई थी। एसीबी की विवेचना पूरी होने के बाद प्रकरण में दो लोक सेवक आरोपियों बैजनाथ विश्वकर्मा और उमेश चंद्र श्रीवास्तव के विरुद्ध अभियोजन स्वीकृति प्राप्त कर चालान तैयार किया गया और एसीबी सरगुजा की टीम द्वारा उन्हें गिरफ्तार किया गया।

इस प्रकरण में शामिल चारों ट्रैवल संचालक अभी फरार बताए गए हैं। उनके खिलाफ भी न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया गया है। प्रकरण के अन्य आरोपी सेवानिवृत्त आईएएस अफसर वीके धुर्वे के विरुद्ध अभियोजन स्वीकृति आदेश प्राप्त करने के लिए केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग को प्रस्ताव भेजा गया है जो अभियोजन स्वीकृति आदेश आते ही अलग से पूरब चालान तैयार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा।

अंबिकापुर छत्तीसगढ़