Chhattisgarh: मनेंद्रगढ़ में बनेगा छत्तीसगढ़ का पहला समुद्री फॉसिल पार्क, 21 मार्च को सीएम भूपेश बघेल रखेंगे आधारशिला

Chhattisgarh: मनेंद्रगढ़ में बनेगा छत्तीसगढ़ का पहला समुद्री फॉसिल पार्क, 21 मार्च को सीएम भूपेश बघेल रखेंगे आधारशिला

रायपुर। Chhattisgarh: कोरिया जिले के मनेंद्रगढ़ में छत्तीसगढ़ का पहला समुद्री फॉसिल्स पार्क स्थापित किया जाएगा। 21 मार्च को विश्व वानिकी दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल इस पार्क की आधारशिला रखेंगे।

इस पार्क में 25 करोड़ साल पुराने समुद्री फॉसिल्स के समृद्ध संग्रह की खोज को संरक्षित किया जाएगा। पार्क का निर्माण हसदेव नदी के तट पर स्थित आमाखेरवा में किया जा रहा है।  

वर्ष 2012 में जीवाश्म विज्ञानियों की एक टीम ने निरीक्षण के बाद आमाखेरवा में समुद्री फॉसिल्स होने की संभावना व्यक्त की थी। इसके बाद वर्ष 2015 में बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट आफ पैलियोबाटनी, लखनऊ के विशेषज्ञों ने यहां विस्तार से जांच पड़ताल की और फिर 25 करोड़ साल पुराने समुद्री फॉसिल्स के यहां पाए जाने की पुष्टि की थी। वन विभाग द्वारा 2015 में ही फॉसिल्स वाले हिस्सों की घेराबंदी कर हेरिटेज साइट के रूप में संरक्षण का काम शुरू कर दिया गया था।

Marine park manendragarh (photo search- Google)

मनेंद्रगढ़ शहर से लगे ग्राम आमाखेरवा क्षेत्र में हसदेव नदी के बीच करीब एक किलोमीटर का क्षेत्र है, जो बड़ी मात्रा में समुद्री जीवों और वनस्पतियों के जीवाश्म से भरा हुआ है। यहां बाइवाल्व मोलस्का, यूरीडेस्मा और एवीक्यूलोपेक्टेन आदि समुद्री जीवों के जीवाश्म मौजूद हैं। इनके अलावा पेलेसिपोड्स, गैस्ट्रोपोड्स, ब्रेकियोपोड्स, ब्रायोजोअन्स और क्रिएनड्स प्रजाति के जीव भी हैं। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार जिस तरह का फॉसिल्स मनेंद्रगढ़ में है, उस तरह का फॉसिल्स भारत में सुबांसरी (अरुणाचल प्रदेश), राजहरा (झारखंड), दार्जिलिंग (पश्चिम बंगाल) और खेमगांव (सिक्किम) में पाया जाता है।

क्या होता है समुद्री फासिल ?
करोड़ों वर्ष पूर्व जीवित अवस्था में रहे उन समुद्री जीवो के अवशेष जो समय के साथ गर्त में दब गए, लेकिन अपने वास्तविक रूप में संरक्षित हैं उन्हें फॉसिल्स के  कहा जाता है। जलवायु परिवर्तन और समय के साथ आए भौगोलिक बदलावों के दौरान  इन समुद्री जीवो के अंश पत्थरों में दब गए। यह फॉसिल्स पृथ्वी के परिवर्तन के वैज्ञानिक साक्ष्य हैं। 

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