Chhattisgarh: फर्जी एनकाउंटर को बताया नक्सली मुठभेड़, जवानों ने अपने ही साथी पर चलाई थी गोली

Chhattisgarh: फर्जी एनकाउंटर को बताया नक्सली मुठभेड़, जवानों ने अपने ही साथी पर चलाई थी गोली

बिलासपुर। Chhattisgarh: साल 2013 में छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित जिले बीजापुर के एडेसमेट्टा में हुई कथित नक्सली मुठभेड़ को फर्जी करार दिया गया है।

इस मुठभेड़ को लेकर शुरू में ही सवाल उठे थे, जिसके बाद एक न्यायिक जांच आयोग गठित किया गया था। आयोग ने जांच में मुठभेड़ को फर्जी पाया है। सोमवार को न्यायमूर्ति वीके अग्रवाल आयोग की रिपोर्ट विधानसभा में पेश की गई। इस रिपोर्ट में फर्जी मुठभेड़ से जुड़े कई बड़े खुलासे किए गए हैं।

आयोग की रिपोर्ट के अनुसार साल 2013 में सीआरपीएफ के जवानों ने ग्रामीण आदिवासियों को नक्सली बताकर गोली चलाई थी। इसमें आठ आदिवासी मारे गए थे।

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घटना 17-18 मई 2013 की दरमियानी रात बीजापुर जिला मुख्यालय से लगभग 30 किमी दूर जंगल के गांव एडेसमेट्टा में घटित हुई थी। स्थानीय लोग बीज पांडम नाम का आदिवासी उत्सव मनाने के लिए गांव के नजदीक जंगल में इकट्ठा हुए थे। इसी दौरान वहां सीआरपीएफ टीम गश्त कर रही थी। टीम ने ग्रामीणों पर नक्सली समझ कर दहशत में आते हुए पहले फायरिंग शुरू कर दी और निहत्थे ग्रामीणों को मौत के घाट उतार दिया। जवानों ने इस घटना को लेकर नक्सल एनकाउंटर  दावा किया था।

आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि लोकल इंटेलिजेंस के फेल होने की वजह से यह दर्दनाक घटना घटी थी। अगर इंटेलिजेंस ने अपना काम सही तरीके से किया होता तो यह घटना नहीं घटती। साथ ही आयोग ने इंटेलिजेंस को बेहतर बनाने के लिए जवानों को स्पेशल प्रशिक्षण देने की आवश्यकता का सुझाव दिया है। आयोग ने यह भी बताया कि कोबरा  बटालियन के दिवंगत कॉन्स्टेबल देव प्रकाश को माओवादियों की गोली नहीं लगी थी, बल्कि साथियों ने ही उन्हें गोली मारी थी। इस तरह फर्जी एनकाउंटर को नक्सल मुठभेड़ बताकर पेश किया गया था।

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