CBI Investigations: 10 लाख रिश्वत के खेल में कैसे फंसे NHAI अधिकारी और कोल इम्पोर्ट कंपनी के प्रतिनिधि!

CBI Investigations: 10 लाख रिश्वत के खेल में कैसे फंसे NHAI अधिकारी और कोल इम्पोर्ट कंपनी के प्रतिनिधि!

नई दिल्ली। शुक्रवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के एक वरिष्ठ अधिकारी दिग्विजय मिश्रा के साथ निजी कोल इम्पोर्ट कंपनी, जीएचवी इंडिया के प्रतिनिधि टीपी सिंह को मुंबई की एक निजी कंपनी के एक प्रतिनिधि से, 10 लाख रुपये की रिश्वत लेने के प्रयास में रंगे हाथों पकड़ा है। गुजरात के गांधीनगर में एनएचएआई के मुख्य महाप्रबंधक (टेक) और रीजनल ऑफिसर के रूप में कार्यरत दिग्विजय मिश्रा तथा सिविल इंजीनियरिंग कंपनी के प्रतिनिधि टीपी सिंह को गिरफ्तार करने के अलावा, सीबीआई की एंटी करप्शन विंग ने जीएचवी इंडिया के प्रबंध निदेशक जाहिद जयपुरा और अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। उल्लेखनीय है की जीएचवी इण्डोनेसीआई कंपनी बारा दया एनर्जी की एक प्रमुख पार्टनर है और अभी कुछ ही दिनों पहले इसका चयन कोल् इंडिया लिमिटेड (CIL) द्वारा देश में आयातित कोयला मंगाने के लिए भी हुआ है।

शुक्रवार को सीबीआई द्वारा कि गई कार्रवाई निजी ठेकेदारों से मिली धांधली की जानकारी के बाद हुई है। इसके अलावा सीबीआई ने अहमदाबाद स्थित न्यू इंडिया कॉन्ट्रैक्टर्स एंड डेवलपर्स, गांधीनगर स्थित एमकेसी इंफ्रास्ट्रक्चर और अज्ञात सरकारी अधिकारियों के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की है।

संदिग्ध इंडोनेशियाई कोल इम्पोर्ट कंपनी के साथ भागीदारी

पिछले हफ्ते जीएचवी, कोल इण्डिया के 30 लाख टन कोयला इंपोर्ट के लिए जारी दो टेंडर्स में सबसे कम बोली लगाने वाले के रूप में उभरा था। इन अनुबंधों की कीमत करीब 9,000 करोड़ रुपये आंकी गई है। हालांकि कई प्रमुख मीडिया संस्थानों की नजर से ये बचा रहा कि जीएचवी ने संदिग्ध इंडोनेशियाई फर्म बारा दया एनर्जी के साथ भागीदारी में इस डील को फाइनल किया है, और यह वही कंपनी है जिसे पिछले साल गुजरात सरकार की बिजली उत्पादन इकाई गुजरात स्टेट एनर्जी कॉरपोरेशन द्वारा कोयले की अनुबंधित मात्रा की आपूर्ति न करने के लिए ब्लैकलिस्ट किया गया था। मुंबई स्थित जीएचवी, नेशनल हाइवे, रेलवे और इमारतों के लिए ईपीसी सेवाओं में लगी हुई है। फिर सीबीआई ने यह भी बताया कि, इन पर आरोप लगाया गया था कि दिग्विजय मिश्रा और अन्य अपने अधिकार क्षेत्र में एनएचएआई प्रोजेक्ट्स में काम कर रहीं निजी कंपनियों के कुछ प्रतिनिधियों के साथ मिलकर अवैध गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे।

रूस-यूक्रेन युद्ध ने बढ़ाई देश में कोयले की किल्लत

यूक्रेन और रूस के बीच चल रहे युद्ध के कारण भारत को कोयले की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। हाल ही में, बिजली मंत्रालय ने कोल इंडिया को राज्य के स्वामित्व वाली और प्राइवेट पावर प्रोजेक्ट्स की मांगों को पूरा करने के लिए कोयले के इंपोर्ट तक को सीमित करने का निर्देश दे दिया है। ऐसे में जीएचवी इंडिया और इसका कंसोर्टियम पार्टनर बारा दया, पूर्वी व पश्चिमी तटों पर कोयले की आपूर्ति के लिए दो टेंडर्स में सबसे कम बोली लगाने वाला रहा है, जो अपने आप में संदेहास्पद है। सीबीआई अधिकारी ने बताया कि कथित तौर पर दिग्विजय मिश्रा को रिश्वत दी जा रही थी ताकि निजी फर्मों को पूर्णता प्रमाण पत्र जारी करने, बिलों की प्रोसेसिंग और सम्मानित कार्यों की सुचारू प्रगति और इस तरह के अन्य कार्यों में पक्ष दिखाया जा सके।

गांधी नगर के क्षेत्रीय अधिकारियों के संपर्क में इंडोनेशियाई कंपनी

सीबीआई के अनुसार, “कंपनी के अधिकारी, गांधीनगर में एनएचएआई के रीजनल ऑफिसर दिग्विजय मिश्रा के संपर्क में थे, विशेष रूप से चल रहे प्रोजेक्ट पैकेज- I (अहमदाबाद-धोलेरा 00.00 से 22.00 केएम तक) पैकेज-II (अहमदाबाद-धोलेरा किमी 22.00 से किमी 48.52 तक) और आरई वॉल (सस्टेनिंग सॉइल की दीवार का उपयोग बाद में मिट्टी को बनाए रखने के लिए किया जाता है ताकि इसे कैरिजवे के दोनों किनारों पर विभिन्न स्तरों पर बनाए रखा जा सके) और साथ ही ईओटी ( समय का विस्तार) पैकेज- III निर्माण (अहमदाबाद-धोलेरा केएम 48.52 से केएम 71.06 तक) का मामला, के संबंध में अवैध तरीकों से एहसान प्राप्त करने के मामले में लिप्त थे।

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