Bappi Lahiri passed away: नहीं रहे गायकी की दुनिया के अनूठे सितारे बप्पी दा, 69 साल की आयु में हुआ निधन

Bappi Lahiri passed away: नहीं रहे गायकी की दुनिया के अनूठे सितारे बप्पी दा, 69 साल की आयु में हुआ निधन

मुंबई। Bappi Lahiri passed away: सिंगिंग की दुनिया के अल्टीमेट सितारे गायक और संगीतकार बप्‍पी लाह‍िड़ी का निधन हो गया है।

बप्पी दा के नाम से मशहूर हमेशा गोल्ड ज्वेलरी से लदे रहने वाले और अपनी खास पर्सनालिटी और आवाज से लोगों के दिलों पर राज करने वाले इस अनूठे गायक ने आज 69  साल की उम्र में मुंबई में अपनी अंत‍िम सांसे लीं। बप्पी लाह‍िड़ी ऑब्स्ट्रक्ट‍िव स्लीप एपन‍िया (OSA) और रीकरेंट चेस्ट इन्फेक्शन से ग्रस‍ित थे। उन्हें 1 दिन पहले ही अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया था। जुहू स्थित क्रिट‍िकेयर हॉस्प‍िटल में वह पिछले 29 दिनों तक भर्ती थे।

बप्पी दा ने बॉलीवुड और बांग्ला फिल्म इंडस्ट्री को अपनी आवाज के जादू से नई पहचान दिलाई। उनके गाए हुए गाने भारत ही नहीं दुनिया के कई देशों विशेषकर रसिया में काफी लोकप्रिय हैं। बप्पी दा का गायकी का अंदाज ही निराला था इसके साथ ही उनकी जीवनशैली भी बिल्कुल अलग और हटकर करती। उन्हें ज्वेलरी पहनने का काफी शौक था और वे अपने गले में कई गोल्ड चेन पहनते थे। हाथों में ब्रेसलेट पहना करते थे। उनका यह अंदाज लोगों को बहुत आकर्षित करता था।

बप्पी दा की मृत्यु की खबर से बॉलीवुड में शोक की लहर है, इसके साथ ही उनके प्रशंसक भी बेहद दुखी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई राजनेताओं और बॉलीवुड हस्तियों ने ट्वीट कर बप्पी दा की मृत्यु पर अपनी शोक संवेदना अभिव्यक्त की है। बप्‍पी लाहिड़ी जिनका असली नाम अलोकेश लाहिड़ी है का जन्‍म 27 नवंबर 1952 को जलपैगुड़ी पश्चिम बंगाल में हुआ था। इनके पिता का नाम अपरेश लाहिड़ी तथा मां का नाम बन्‍सारी लाहिड़ी है।

बप्‍पी लाहिड़ी ने मात्र तीन वर्ष की आयु में ही तबला बजाना शुरू कर दिया था जिसे बाद में उनके पिता के द्वारा और भी गुर सिखाये गये। बॉलीवुड को रॉक और डिस्को से रू-ब-रू कराकर पूरे देश को अपनी धुनों पर थिरकाने वाले मशहूर संगीतकार और गायक बप्पी लाहिड़ी ने कई बड़ी छोटी फिल्‍मों में काम किया है। बप्पी दा ने 80 के दशक में बालीवुड को यादगार गानों की सौगात दे कर अपनी पहचान बनाई।

महज 17 साल की उम्र से ही बप्पी संगीतकार बनना चाहते थे और उनकी प्रेरणा बने एसडी बर्मन। बप्पी टीनएज में एसडी बर्मन के गानों को सुना करते और उन्हें रियाज किया करते थे।

जिस दौर में लोग रोमांटिक संगीत सुनना पसंद करते थे उस वक्त बप्पी ने बॉलीवुड में ‘डिस्को डांस’ को इंट्रोड्यूस करवाया। उन्हें अपना पहला अवसर एक बंगाली फ़िल्म, दादू (1972) और पहली हिंदी फ़िल्म नन्हा शिकारी (1973) में मिला जिसके लिए उन्होंने संगीत दिया था। जिस फ़िल्म ने उन्हें बॉलीवुड में स्थापित किया, वह ताहिर हुसैन की हिंदी फ़िल्म ज़ख़्मी (1975) थी, जिसके लिए उन्होंने संगीत की रचना की और पार्श्व गायक के रूप में दोगुनी कमाई की।

इस फिल्म ने उन्हें प्रसिद्धि की ऊंचाइयों पर पहुंचाया और हिंदी फिल्म उद्योग में एक नए युग को आगे लाया। इसके बाद तो वे फिल्‍म दर फिल्‍म बुलंदियों को छूते गये और बॉलीवुड में अपना नाम बड़े कलाकार के रूप में प्रतिष्ठित किया।

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