Raipur: विश्व सिकल सेल जागरूकता दिवस पर विशेष वेबिनार का आयोजन

Raipur: विश्व सिकल सेल जागरूकता दिवस पर विशेष वेबिनार का आयोजन

रायपुर। Raipur: स्वास्थ्य सबसे बड़ा धन है, इस बात की समझ अगर बच्चों को बचपन से हो जाए तो उन में स्वच्छता, स्वस्थ रहने और अपने विचारों को शुद्ध करने की प्रेरणा मिलेगी। कुपोषित या एनीमिक बच्चों की मानसिकता में काफी असर पडता है, ऐसी स्थिति में आज विश्व सिकल सेल जागरूकता दिवस के अवसर पर सभी को इस बात के लिए प्रेरित करने के लिए शिक्षकों ने मिलकर वेबिनार आयोजित किया।

शिक्षकों की जवाबदारी बच्चों के स्वास्थ्य ,शिक्षा और उनके शारीरिक विकास के लिए है। साथ ही उन्हे व अभिभावकों को जागरुक करना भी बहुत जरुरी है। स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का विकास होता है। इस दृष्टि से शाला में बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति शिक्षकों को सचेत होना आवश्यक है। इस पर वर्च्युल वेबिनार के माध्यम से मनोवैज्ञानिक व डाक्टरों के सहयोग से आयोजकों ने वैबिनार रखा जिसका खुबसुरत संचालन रीता मंडल ने किया।

जिसमे डा. सत्यजीत साहु जो कि डाइबिट्स स्पेशलिस्ट , साथ ही डा.वर्निका शर्मा, मनोवैज्ञानिक तथा के.एस.पाटले (डी.एम.सी) समग्र शिक्षा विशिष्ट अतिथी थे। अतिथियों ने बहुत ही सरल उदाहरणों के माध्यम से सिकल सेल की विस्तृत जानकारिया व बचाव, सुरक्षा के उपाय बताए। साथ ही सामान्य एनिमीया व सिकेल सेल एनिमीया मे अंतर को स्पष्ट किया।

शाला की शिक्षिका चानी ऐरी ने बताया कि वे अपनी शाला में ऐसे बच्चों की सुरक्षा हेतु किस प्रकार बच्चों को सहयोग करते हुए व उनहे शाला में दूसरे बच्चों के समान व उनके साथ पढने रहने के लिए प्रेरित करती है। प्रज्ञा सिंग ने बताया कि वे शाला प्रबंधन के साथ शाला मे बच्चों हेतु कैसे काम करती है। सौम्य देवागन जी ने भी सिकल सेल के बारे मे तथा उससे जुडी छात्र वृत्ति आदि के बारे मे बताया।

शिक्षक धर्मानंद गोजे ने बताया कि सिकलसेल से सम्बंधित बच्चों के लिए बतौर शिक्षक हम बच्चों में उत्साह और आत्मविश्वास पैदा कर सकते हैं साथ ही उनपर विशेष दृष्टि भी रखनी चाहिए। समय-समय पर ऐसे बच्चों को उचित और नियमित खेल से जोड़े रखना चाहिए। शिक्षक चैलेंद्र साहू द्वारा एनीमिया से पीड़ित व्यक्तियों को कैसी सावधान रखनी चाहिए इस विषय में जानकारी दी गई। यह एक सफल व ज्ञानवर्धक आयोजन रहा।

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